Sundar Ray
1 year ago
रोजाना इसे खाने पर दवा की जरूरत नहीं, दूर हो जाएंगे ये बड़े रोग


हिंदू धर्म में तुलसी को सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि देवी का रूप माना गया है। यही कारण है कि आंगन में तुलसी का पौधा लगाना और उसकी पूजा करना सदियों से भारतीय परंपरा रही है। घर में तुलसी लगाने और उसकी पूजा करने के पीछे भी कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। ऋषि-मुनियों ने यह अनुभव किया कि इस पौधे में कई बीमारियों को ठीक करने की क्षमता है। साथ ही, इसे लगाने से आसपास का माहौल भी साफ-सुथरा व स्वास्थ्यप्रद रहता है। इसीलिए उन्होंने हर घर में कम से कम एक पौधा लगाने के लिए लोगों को प्रेरित किया।

तुलसी के स्वास्थ्य प्रदान करने वाले गुणों के कारण इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि इसका पूजन किया जाने लगा। तुलसी सिर्फ बीमारियों पर ही नहीं, बल्कि मनुष्य के आंतरिक भावों और विचारों पर भी अच्छा प्रभाव डालती है। भारतीय आयुर्वेद के सबसे प्रमुख ग्रंथ चरक संहिता में कहा गया है।


हिक्काज विश्वास पाश्र्वमूल विनाशिन:। पितकृतत्कफवातघ्नसुरसा: पूर्ति: गन्धहा।।

सुरसा यानी तुलसी हिचकी, खांसी, जहर का प्रभाव व पसली का दर्द मिटाने वाली है। इससे पित्त की वृद्धि और दूषित वायु खत्म होती है। यह दूर्गंध भी दूर करती है।

तुलसी कटु कातिक्ता हद्योषणा दाहिपित्तकृत।दीपना कृष्टकृच्छ् स्त्रपाश्र्व रूककफवातजित।।

तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली दिल के लिए लाभकारी, त्वचा रोगों में फायदेमंद, पाचन शक्ति बढ़ाने वाली और मूत्र से संबंधित बीमारियों को मिटाने वाली है। यह कफ और वात से संबंधित बीमारियों को भी ठीक करती है। शास्त्रों में भी कहा गया है

त्रिकाल बिनता पुत्र प्रयाश तुलसी यदि। विशिष्यते कायशुद्धिश्चान्द्रायण शतं बिना।। तुलसी गंधमादाय यत्र गच्छन्ति: मारुत:।दिशो दशश्च पूतास्तुर्भूत ग्रामश्चतुर्विध:।।

यदि सुबह, दोपहर और शाम को तुलसी का सेवन किया जाए तो उससे शरीर इतना शुद्ध हो जाता है, जितना अनेक चांद्रायण व्रत के बाद भी नहीं होता। तुलसी की गंध जितनी दूर तक जाती है, वहां तक का वातारण और निवास करने वाले जीव निरोगी और पवित्र हो जाते हैं।

तुलसी तुरवातिक्ता तीक्ष्णोष्णा कटुपाकिनी।रुक्षा हृद्या लघु: कटुचौहिषिताग्रि वद्र्धिनी।। जयेद वात कफ श्वासा कारुहिध्मा बमिकृमनीन।दौरगन्ध्य पार्वरूक कुष्ट विषकृच्छन स्त्रादृग्गद:।।

तुलसी कड़वे व तीखे स्वाद वाली कफ, खांसी, हिचकी, उल्टी, कृमि, दुर्गंध, हर तरह के दर्द, कोढ़ और आंखों की बीमारी में लाभकारी है। तुलसी को भगवान के प्रसाद में रखकर ग्रहण करने की भी परंपरा है, ताकि यह अपने प्राकृतिक स्वरूप में ही शरीर के अंदर पहुंचे और शरीर में किसी तरह की आंतरिक समस्या पैदा हो रही हो तो उसे खत्म कर दे। शरीर में किसी भी तरह के दूषित तत्व के एकत्र हो जाने पर तुलसी सबसे बेहतरीन दवा के रूप में काम करती है। सबसे बड़ा फायदा ये कि इसे खाने से कोई रिएक्शन नहीं होता है।
 
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