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3 months ago
शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने वाले भोजन: फोटो

  • हाई चेयर पर बैठकर भोजन खाता हुआ शिशु
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    आपके शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली

    आपके शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली अभी विकसित हो रही होती है, और इसके परिपक्व होने तक हो सकता है आप पाएं कि शिशु को अक्सर जुकाम या खांसी हो जाती है। कुछ ऐसे भोजन हैं, जिन्हें संक्रमणों से लड़ने में शरीर की मदद करने के लिए जाना जाता है। यहां जानें कि ये भोजन कौन से हैं और आप शिशु के आहार में इन्हें कैसे शामिल कर सकते हैं।
  • शिशु को स्तनपान करवाती मां
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    स्तनदूध

    पहले छह महीनों तक शिशु को अनन्य स्तनपान (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराना उसकी विकसित हो रही प्रतिरक्षण प्रणाली को सहारा देने का सबसे अच्छा तरीका है। आपके स्तनदूध में एंटीबॉडीज होती है जिनका उत्पादन आपका शरीर करता है। जब तक शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं हो जाती, ये एंटीबॉडीज उसकी संक्रमणों से लड़ने में मदद करती हैं। जब आप शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरु करती हैं, तो जब तक वह पूरी तरह स्तनपान नहीं छोड़ता, तब तक स्तनदूध उसके लिए पोषक तत्वों का महत्पूर्ण स्त्रोत रहेगा।
  • कटोरे में रखी दाल
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    प्रोटीन

    शिशु की संक्रमणों से लड़ने मे मदद करने वाली एंटीबॉडीज प्रोटीन से बनी होती हैं। शिशुओं को वयस्कों की तुलना में अपने कुल आहार में प्रोटीन का प्रतिशत ज्यादा चाहिए होता है।

    शिशु को दिए जाने वाले हर भोजन में प्रोटीन के स्त्रोत को शामिल कीजिए। आपके शिशु को जरुरी प्रोटीन शाकाहारी या मांसाहारी दोनों तरह के आहारों से मिल सकता है।

    प्रोटीन के अच्छे स्त्रोतों में शामिल हैं:
    • फलियां जैसे मटर, चना, छोले, लोबिया, राजमा और दालें
    • सोया
    • मीट, मुर्गी और मछली
    • डेयरी उत्पाद जैसे कि दूध, दही या चीज़
    • अंडे (अच्छी तरह पके हुए)
    • मेवे (पीस कर या पाउडर बनाकर ताकि शिशु के गले में अटकने का खतरा न रहे और ये तभी दें जब परिवार में मेवों से एलर्जी का इतिहास न हो)
    • अच्छी तरह पके हुए मशरूम यानि खुंभ

    याद रखें कि शिशु को एक साल का होने से पहले गाय या भैंस का दूध पीने के लिए न दें। आप खाना पकाने में दूध का इस्तेमाल कर सकती हैं, मगर पेय के तौर पर पहले साल उसे स्तनदूध या फॉर्मूला दूध ही दें। इसका कारण जानने के लिए आप हमारा यह लेख पढ़ें 'मैं शिशु को गाय का दूध देना कब शुरु कर सकती हूं?'
  • दही
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    प्रोबायोटिक्स

    प्रोबायोटिक भोजनों में जीवित, स्वास्थ्यकर जीवाणु (गुड बैक्टीरिया) होते हैं। प्रोबायोटिक्स बुरे जीवाणुओं (बैड बैक्टीरिया) को नियंत्रण में रखते हैं। ये आंतों के जरिये खून में जाने वाले बुरे जीवाणुओं की संख्या को भी घटाते हैं, जिससे शिशु की प्रतिरक्षण क्षमता स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

    प्रोबायोटिक्स से भरपूर भोजनों में शामिल है दही और दही से बने व्यंजन जैसे कि लस्सी, छाछ या रायता।

    प्रोबायोटिक्स आपके शिशु के लिए विशेषतौर पर तब फायदेमंद है जब उसे पेट का इनफेक्शन हो। वे दस्त (डायरिया) के दौरान शरीर से निकले या एंटीबायोटिक्स से खत्म हुए गुड बैक्टीरिया की पूर्ति करते हैं।
  • केले की प्यूरी
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    प्रीबायोटिक्स

    प्रीबायोटिक्स हमारे शरीर की संक्रमणों से लड़ने में मदद करने वाले गुड बैक्टीरिया को पोषित करते हैं। इसलिए प्रोबायोटिक भोजनों के साथ-साथ शिशु के आहार में प्रीबायोटिक्स युक्त भोजनों को भी शामिल करें।

    प्रीबायोटिक्स प्राकृतिक रूप से निम्न खाद्य पदार्थो में मिलते हैं:
    • केला
    • प्याज
    • लहसुन
    • टमाटर

    केले और दही की प्यूरी प्रतिरक्षण क्षमता बढ़ाने वाला एक अच्छा स्नैक या भोजन है। इसमें प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक्स दोनों शामिल हैं।
  • चपाती
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    फाइबर

    फाइबर प्रीबायोटिक भोजनों के सबसे अच्छे रूप में से एक है। शिशु के आहार में फाइबर शामिल करने के लिए आप साबुत अनाज के आटे या फिर कई तरह के अनाज के आटे को मिलाकर रोटी या चपातियां बना सकती हैं।

    कोशिश करें कि आप ब्रेड या पूरी के लिए मैदा की बजाय हमेशा साबुत अनाज के आटे को चुनें।

    फल भी फाइबर के बेहतरीन स्त्रोत हैं। फलों के रस में कोई फाइबर नहीं होता, इसलिए शिशु को रस की बजाय असली फल देना हमेशा स्वास्थ्यकर रहता है।
  • सिट्रस फल व सब्जियां
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    विटामिन सी

    विटामिन सी स्वस्थ प्रतिरक्षण प्रणाली को बढ़ावा देता है। विटामिन सी के बहुत से स्त्रोत स्वाद में खट्टे होते हैं। इसलिए इन्हें खाना शुरु करने में शिशु को कुछ समय लग सकता है।

    शिशु आहार में इन भोजनों को जल्दी शामिल करने से शिशु को इनके स्वाद का आदि हो जाता है और उसे स्वस्थ भोजन खाने की आदत पड़ जाएगी।

    विटामिन सी के अच्छे स्त्रोतों में शामिल हैं:
    • सिट्रस फल जैसे कि नींबू, मौसमी और संतरे
    • बेरी जैसे आंवला, नीलबद्री, स्ट्रॉबेरी, करौंदा
    • शामिला मिर्च
    • शकरकंदी
    • अमरूद
    • हरी गोभी
    • टमाटर

    आप विटामिन सी के लिए शिशु को शकरकंदी और शिमला मिर्च की प्यूरी बनाकर दे सकती हैं।
  • हरी प्यूरी
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    आयरन

    आयरन की कमी से शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली की कार्य करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, जिससे शिशु को संक्रमणों और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    शिशु को वयस्कों की तुलना में अधिक आयरन की जरुरत होती है। आयरन से भरपूर निम्नांकित भोजनों को अपने आहार में शामिल करने का प्रयास करें:
    • मांसाहारी भोजन जैसे मीट, मुर्गी, अंडे
    • हरी पत्तेदार सब्जियां, जैसे चौली, मूली पत्ता, सरसों का साग, मेथी और शलगम का साग
    • बीन्स
    • मेवे (पीस कर ताकि गले में न अटकें और ये तभी दें जब परिवार में मेवों से एलर्जी का इतिहास न हो)
    • खुबानी
    • साबुत अनाज

    आपका शिशु जो आयरन खा रहा है, वह शरीर में अवशोषित हो इसके लिए आयरन समृद्ध आहारों के साथ उसी समय विटामिन सी से भरपूर आहार भी दें।
  • एसेंशियल फैट्टी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ
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    जरुरी वसीय अम्ल (एसेंशियल फैटी एसिड्स)

    जरुरी वसीय अम्ल (ईएफए) अच्छी वसा होती है, जो प्रतिरक्षण प्रणाली को इनफेक्शन पहचानने और उससे लड़ने में मदद करती है।

    आपके शिशु को स्तनदूध से पर्याप्त मात्रा में ईएफए मिलेगा। सुनिश्चित करें कि आप अपने आहार में जरुरी वसीय अम्ल के अच्छे स्त्रोतों को अपने आहार में शामिल करें।

    जब आप शिशु का दूध छुड़वाना शुरु करें और दिन में कम बार स्तनपान कराएं तो वसीय अम्ल के और अधिक स्त्रोतों को शिशु के साप्ताहिक आहार में शामिल करें।

    ईएफए से भरपूर भोजनों में शामिल हैं:
    • तैलीय मछलियां जैसे कि चूरा मछली, बांगड़ा मछली, पेड़वे, भिंग मछली, रावस मछली और सुरमई
    • मेवे जैसे अखरोट
    • दालें, मटर, राजमा, लोबिया आदि
    • अलसी
    • कद्दू के बीज
    • अंडे
    • फलियां
    • मक्खनफल या वेन्नाई पझम
  • फल व सब्जियां
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    फल और सब्जियां

    सही मायने में स्वस्थ प्रतिरक्षण प्रणाली के लिए शिशु को आहार से विटामिन ए, जिंक, सिलेनियम और मैग्नीशियम जैसे विटामिन व खनिज मिलने चाहिए।

    शिशु को सभी जरुरी चीजें मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए उसे फलों, सब्जियों, मेवों (हमेशा पीस कर) और डेयरी उत्पाद युक्त संतुलित और विविध आहार दें।

    शिशु को एक बार में एक ही नया भोजन दें और इसके बाद पांच दिन के बाद ही कोई दूसरा नया भोजन उसे खिलाएं। इस तरह यह पता चल सकेगा कि शिशु को किसी विशेष भोजन से कोई एलर्जी तो नहीं है।
  • लोकप्रिय भारतीय मसाले
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    मसाले और कोंडिमेंट्स

    कुछ भारतीय मसालों में एंटीआॅक्सीडेंट, एंटीइन्फ्लेमेटरी और एंटिसेप्टिक तत्व होते हैं, जो शिशु की प्रतिरक्षण प्रणाली को सहयोग दे सकते हैं।

    शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए फायदेमंद और शिशु के आहार में सीमित मात्रा में शामिल किए जा सकने वाले मसालों में शामिल हैं:
    • हल्दी
    • लहसुन
    • लौंग
    • तुलसी
    • केसर

    यह स्लाइडशो डॉक्टर शवेता कौशल के सहयोग से तैयार किया गया है। वे जुड़वां शिशुओं की माँ हैं और अपने परिवार को संपूर्ण और पौष्टिक आहार खिलाने का उत्साह रखती हैं। यह स्लाइडशो हमारी आहार विशेषज्ञ नीलांजना सिंह द्वारा सीमिक्षित है।


    Click here to see the English version of this slideshow.
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